आइये जाने ब्याघ्र की खाल पर क्यों बैठते हैं भोलेनाथ ?

baagh ki khaal भगवान शिव को त्याग, तप और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। शायद ही कोई अन्य देवता प्रकृति के इतना नजदीक हो। अन्य देवताओं से इतर शिव को [...]

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भोलेनाथ के १०८ नाम और उनके अर्थ

lord-shiva
शिव – कल्याण स्वरूप महेश्वर – माया के अधीश्वर शम्भू – आनंद [...]

आइये जाने क्या होता है प्रदोष व्रत

pradosh--vrat
स्कंद पुराण के अनुसार प्रत्येक माह की दोनों पक्षों (कृष्ण पक्ष , [...]

आइये जाने क्यों प्रिय है भोलेनाथ को श्रावण माश

shraavan maash
हिंदी पंचांग के अनुसार पांचवां मास श्रावण का होता है। आम बोलचाल की [...]

आइये जाने कुबेर का अहंकार कैसे टूटा

kuber ka ahankaar
कुबेर तीनो लोकों में सबसे धनि थे । इस बात का उन्हें अहंकार हो गया था [...]

जानिये माँ सती ने क्यों आत्मदाह किया

Lord Shiva in Grief Holding the Body of Sati
जानिये माँ सती ने क्यों किया आत्मदाह एक बार प्रजापति दक्ष ने [...]

जानिए कौन है वीरभद्र

veerabhadra shivgatha
भोलेनाथ का रौद्र रूप है वीरभद्र यह अवतार तब हुआ था जब प्रजापति [...]

जानिए क्यों काटा महादेव ने ब्रह्मदेव का पांचवा शिर

जानिए क्यों काटा महादेव ने  ब्रह्मदेव का पांचवा शिर
एक बार सुमेरु पर्वत पर बैठे हुए ब्रह्मदेव के पास जाकर देवताओं ने [...]

वेदों द्वारा शिव की ब्याख्या

vedon dwara shiv ki byakhya
ऋग्वेद जिसके भीतर समस्त भूत निहत है तथा जिससे सब कुछ प्रवत्त होता [...]

अर्धनारीश्वर शिव

सृष्टि के प्रारम्भ में जब ब्रह्माजी द्वारा रची सृष्टि का विस्तार नहीं हो पाया, तब ब्रह्मा जी बहुत दुखी हुए । उसी समय आकाशवाणी हुई मैथुनी सृष्टि करो । परन्तु उस समय तक नारी की उत्पत्ति नहीं हुई थी इसलिए उनके लिए इस सृष्टि का निर्माण करना मुस्किल था । इसपर उन्होंने सोचा बिना भोलेनाथ के कृपा के संभव नहीं हो पाएगा । अतः ब्रह्मदेव शिवजी को प्रशन्न करने के लिए घनघोर टप करने लगे । जिसके फलस्वरूप महादेव ने उन्हें अर्धनारिस्वर रूप में दर्शन दिया । शिव जी के इस रूप को देखकर ब्रह्मदेव अभिभूत हुए और उन्हें साष्टांग प्रणाम किआ । महादेव ने कहा ब्रह्मदेव मुझे तुम्हारा मनोरथ ज्ञात हो गया है । तुमने सृष्टि के विकाश के लिए जो तप किआ उससे मई अति प्रशन्न हूँ । मैं तुम्हारी इच्छा अवस्य पूरी करूँगा । ऐसा कहकर महादेव ने माता आदिशक्ति को अपने शरिर के आधे भाग से अलग कर दिआ । इसके पश्चात ब्रह्मदेव माता आदिशक्ति को प्रणाम करके कहने लगे - सृष्टि के प्राम्भ में आपके पति देवों के देव महादेव ने मेरी रचना की थी । उन्ही के आदेश से मैंने देवता आदि समस्त प्रजाओं की मानसिक रचना की । लेकिन कई प्रयासों के बाद भी उनकी बृद्धि करने में असफल रहा हूँ । अतः मैंstri पुरुष के समागम से मई प्रजाओं को उत्पन्न कर श्रिष्टि का विस्तार करना चाहता हूँ । किन्तु अभीतक नारी कुल का प्राकट्य नहीं हुआ है । और नारी कुल की श्रिष्टि करना मेरी शक्ति से बहार है । देवी आप सम्पूर्ण श्रिष्टि तथा शक्तियों की जननी हैं । इसलिए हे माता मुझे नारी कुल की श्रिष्टि करने की शक्ति प्रदान करें । मैं आपसे एक और विनती करता हु की आप चराचर जगत के मेरे पुत्र दक्ष की पुत्री के रूप में जन्म लेने की कृपा करें । माता जगतजननी ने कहा "तथास्तु" ऐसा ही होगा । और मत ने ब्रह्मदेव को नारी कुल की श्रिष्टि करने की शक्ति प्रदान की । इसके लिए उन्होंने अपने भौहों से अपने सामान एक शक्ति प्रकट की । तभी से इस लोक में मैथुनी श्रिष्टि चल पड़ी । जैसे फोन में गंध, सूर्य में किरणे स्वाभाव सिद्ध हैं उसी प्रकार शिव में शक्ति भी स्वभाव सिद्ध हैं । महादेव अजन्मा आत्मा हैं और शक्ति संसार में नाम रूप में व्यक्त सत्ता । यही है अर्धनारिस्वर महादेव का रहस्य ।
सृष्टि के प्रारम्भ में जब ब्रह्माजी द्वारा रची सृष्टि का विस्तार [...]

जानिए महादेव को क्यों नहीं अर्पित करनी चाहिए ये चीज़ें

ketki tulsi
हिंदू धर्म और परंपरा के अनुसार शिवलिंग कभी ऐसी जगह नहीं रखा जाता [...]